मथुरा के साैंख में श्री आदर्श रामलीला सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में स्थानीय पात्रों द्वारा नारद मोह लीला का मंचन किया। शुभारंभ चेयरमैन योगेश लंबरदार ने फीता काटकर किया। मंचन में नारद तपस्या करने बैठ जाते हैं। जिसके कारण राजा इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र, नारद की तपस्या भंग करने के लिए अपने सेवकों और परियों को भेजते हैं, लेकिन कोई भी कामयाब नहीं होता है। अंत में कामदेव नारद की तपस्या को भंग करने के लिए जाते हैं, लेकिन वह भी तपस्या भंग नहीं कर पाते हैं। इसी बात का नारद जी को घमंड हो जाता है और वह बारी-बारी से भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर से कहते हैं कि हमने कामदेव को जीत लिया है। भगवान विष्णु उनके घमंड को दूर करने के लिए नारद के कहने पर हरि अर्थात बंदर का स्वरूप दे देते हैं, जैसे ही नारद उस रूप को लेकर राजा शील निधि की पुत्री के स्वयंवर में पहुंचते हैं वहां उनका उपहास होने लगता है और इस तरह नारद का घमंड दूर होता है। मंचन में जयप्रकाश शर्मा ने नारद, शिवसिंह लंबरदार ने इंद्र, सागर वर्मा ने विष्णु, पवन शर्मा ने विश्व मोहिनी, रामबाबू ने काला देव, भोला शर्मा ने शिवशंकर, श्याम शर्मा ने ब्रह्मा, नीरज शर्मा ने शीलनिध, भीम ने रावण आदि पात्रों का किरदार निभाए। अध्यक्ष संजय बंसल, महामंत्री भरत सिंह, व्यवस्थापक नीरज शर्मा, अभिषेक बजाज, प्रभारी संतोष चौधरी, वीरपाल चौधरी, आदि उपस्थित रहे।