मथुरा के वृंदावन में श्रावण मास के प्रथम सोमवार को वात्सल्य ग्राम में वात्सल्य सावन महोत्सव मनाया गया। छात्राओं ने यमुना तट से जल भरकर कांवर यात्रा निकाली। इस यात्रा में गुरुकुल संविद सैनिक स्कूल की छात्राएं और वात्सल्य ग्राम की साध्वियां शामिल रहीं। यह कांवर यात्रा जब वात्सल्य ग्राम पहुंची तो जल को वात्सल्यमूर्ति साध्वी ऋतंभरा दीदी को सौंपा गया। साध्वी ऋतंभरा दीदी ने मंगल मानस स्थित भगवान भोलेनाथ के 12 फीट ऊंचे और 60 टन के शिवलिंग नर्मदेश्वर पर परिक्रमा करते हुए बेलपत्र, पुष्प अर्पित कर जलाभिषेक किया। उन्होंने कहा श्रावण मास भगवान शिव की उपासना का विशेष समय है। यह महीना प्रकृति के उल्लास और आत्मिक जागरण का प्रतीक है। शिव साधना से आंतरिक शक्तियों का जागरण होता है और तीनों तापों का नाश होता है। उन्होंने समुद्र मंथन की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान शिव ने हलाहल विष को पीकर उसे अपने कंठ में रोक लिया, जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। शिवजी को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं, जिनके तीन पत्तों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। गोकुलम की यशोदा माताओं ने इस पावन अवसर पर मेंहदी रचाई, झूला और पारंपरिक श्रावण मल्हार गाकर वातावरण को जीवंत बना दिया। इस आयोजन में संजय भैया, सुमन लता, सीता परमानंद, साध्वी सुहृदया गिरि, साध्वी शिरोमणि, स्वामी सत्यशील, राजेश पांडेय, मीनाक्षी अग्रवाल, डॉ. लक्ष्मी गौतम, ममता भारद्वाज, अनीता चतुर्वेदी सहित आदि माैजूद रहीं।