मथुरा में राधाकुंड के गांव मुखराई में शनिवार को चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया के अवसर पर परंपरा के अनुसार चरकुला चौक पर चरकुला नृत्य का आयोजन हुआ। जलते दीपों से सजे पांच मंजिला चरकुला को सिर पर रख जैसे ही महिलाओं ने नृत्य किया तो वहां मौजूद स्थानीय व विदेशी श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। वहीं चरकुला चौक राधारानी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। वहीं देर रात रागिनी का आयोजन हुआ। नृत्य की शुरूआत गांव मुखराई की ब्राह्मण परिवार की महिलाओं ने प्राचीन ठाकुर मदन मोहन जी मंदिर में ठाकुरजी को प्रणाम कर की। इस दौरान थाली, नगाड़े, बाम भी बजाए गए। स्थानीय पुरुष लोकगीत गाकर चरकुला कर रहीं महिलाओं को उत्साहित करते दिखे है। मान्यता है कि गांव मुखराई में राधारानी की नानी मुखरा देवी ने राधाजी के जन्म की खबर सुनीं तो खुशी में रथ के पहिए को उठाकर उनके ऊपर दीपक रखकर नृत्य किया। दूसरी मान्यता यह है कि भगवान श्री कृष्ण ने जब गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठाकर इंद्रदेव का अहंकार दूर किया था। तब बृजवासी नर नारियों ने चरकुला नृत्य किया था। सर्वप्रथम मुखराई की महिला कलाकार तोती देवी द्वारा चरकुला नृत्य प्रारंभ किया गया। उनके साथ में उर्मिला देवी, प्रभादेवी, पिंकी देवी ने नृत्य की प्रस्तुति दी।