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VIDEO: मार्कंडेय ऋषि की तपोभूमि पर लक्खी मेला शुरू, पवित्र सरोवर में हजारों ने श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

मैनपुरी के घिरोर थाना क्षेत्र के गांव विधूना स्थित मार्कंडेय मेले का इतिहास काफी पुराना है। मेले का रामायण और महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। यहां प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा से मेले का शुभारंभ होता है। बुधवार को हजारों भक्तों ने पवित्र सरोवर में श्रद्धा की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने महर्षि मार्कंडेय की पवित्र सरोवर में स्नान ध्यान के बाद मंदिर में पूजा अर्चना की। महर्षि मार्कंडेय की तपोभूमि विधूना का प्राचीन इतिहास है। रामायण और महाभारत काल से जुड़े तथ्यों के चलते यहां प्रतिवर्ष कार्तिका पूर्णिमा से लक्खी मेले का शुभारंभ होता है। प्रदेश भर से यहां भक्त स्नान ध्यान और महर्षि के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बुधवार की रात 1 बजे यहां सबसे पहले संतों ने स्नान किया। इसके बाद प्रदेश भर से यहां पहुंचे भक्तों ने स्नान ध्यान शुरू किया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने यहां महर्षि की पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद महर्षि मार्कंडेय के मुख्य मंदिर पर उनकी प्रतिमा पर प्रसाद, पुष्प आदि भेंट किए। इसके साथ ही यहां स्थापित अन्य प्रतिमाओं पर भी भक्तों ने पूजा अर्चना की। महर्षि की तपोभूमि पर मेले का भी शुभारंभ हो गया। मेले में बच्चों, महिलाओं आदि ने खरीदारी की। यहां लगभग एक पखवाड़े तक मेले का आयोजन होगा। बुधवार की देर शाम तक मेले में लोगों की भीड़ देखी गई। बेहतर स्वास्थ्य के लिए चढ़ाए करवा मार्कंडेय मंदिर से पूर्व-दक्षिण दिशा की ओर मंदिर से 200 मीटर की दूरी पर एक वट वृक्ष है। मान्यता है कि यहां वट वृक्ष पर अनाज से भरकर करवा चढ़ाने से घर में बीमारियां नहीं आती हैं। मेले में आने वाले भक्त धर में जितने सदस्य हैं उनके हिसाब से यहां करवा भरकर चढ़ाते हैं।

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