महाराजपुर थाना क्षेत्र के ढोड़ी घाट पर सोमवार शाम गंगा की लहरों में समाए दोनों किशोरों का बुधवार को भी कोई पता नहीं चल सका। हादसे को 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन घरों में चूल्हे ठंडे हैं और आंगन में सन्नाटा पसरा है। दोनों किशोर अपने घरों के इकलौते थे, और अब परिजन घाट किनारे बैठकर बस गंगा की ओर टकटकी लगाए हैं। एनडीआरएफ और 37वीं वाहिनी पीएसी के गोताखोरों के साथ महाराजपुर पुलिस लगातार सर्च अभियान चला रही है। बुधवार को अभियान का दायरा करीब 50 किलोमीटर तक बढ़ाया गया। टीम चंद्रिका देवी, बक्सर घाट उन्नाव तक पहुंची। एनडीआरएफ के जवानों ने ढोड़ी घाट से नजफगढ़ घाट होते हुए डोमनपुर घाट तक घंटों नाव चलाकर तलाशी की। पनडुब्बी और डीप डाइवर्स भी गंगा में उतरे और एक-एक जगह को खंगाला। तेज बहाव और बदलते पानी के स्तर की वजह से तलाश में दिक्कत आ रही है। उधर घाट पर सुबह से शाम तक परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक पिता बार-बार पानी में हाथ डालकर बेटे का नाम पुकारता है, तो दूसरी बस गंगा की लहरों को निहारते हुए लौट आने की मन्नत मांग रही है। 48 घंटे से उम्मीद और बेबसी के बीच झूलते इन परिवारों को अब बस अपने बच्चों की एक झलक का इंतजार है। महाराजपुर इंस्पेक्टर जनार्दन सिंह ने बताया कि प्रयास लगातार जारी हैं और टीम हर संभव जगह पर खोजबीन कर रही है।