जाजमऊ गंगापुल पर लखनऊ-कानपुर लेन पर एक साल पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गड्ढों को भरने के लिए डामरीकरण कर पैचवर्क कराया था। लेकिन पहली बारिश में ही कार्य की गुणवत्ता की पोल खुल गई। गंगापुल पर 10 जगह छोटे-बड़े गड्ढे हो गए हैं। कुछ स्थानों पर तो सरिया दिखने लगी है। जाजमऊ गंगापुल से रोजाना अनुमानित दो लाख वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में जल्द गड्ढे न भरे गए तो कभी बड़ा हादसा हो सकता है। एक साल पहले एनएचएआई की ओर से जाजमऊ गंगापुल के लखनऊ-कानपुर लेन पर मरम्मत कार्य कराते हुए डामरीकरण पैचवर्क का कार्य कराया गया और पुल के गड्ढों को भरने के साथ ही अन्य कार्य कराए गए। पैचवर्क एक साल भी नहीं टिका। पहली बारिश में जगह-जगह पैचवर्क खुलते चले गए।