सल्फर से साफ होने वाली चीनी को अब बबूल, नीम, आम के पेड़ की छाल से साफ किया जाएगा। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) की निदेशक प्रो. सीमा परोहा की देखरेख में वैज्ञानिकों की टीम ने यह तकनीक विकसित की है। इससे न केवल चीनी मिलों में शुद्ध पानी की बचत होगी बल्कि चीनी की मिठास बढ़ेगी। प्रो. परोहा ने दावा किया कि अभी तक किसी भी अन्य देश में चीनी को साफ करने के लिए पेड़ों की छाल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। प्रो. सीमा परोहा ने बताया कि पूरी दुनिया में अभी चीनी को तैयार करने की चार प्रमुख विधियों में रसायनों का प्रयोग किया जाता है। भारत में 80 फीसदी चीनी मिलें डबल सल्फिटेशन प्रक्रिया का उपयोग करके गन्ने के रस से प्लांटेशन व्हाइट शुगर और कच्ची चीनी या रिफाइंड चीनी बनाती हैं। चीनी को स्वच्छ व सफेद क्रिस्टल जैसा बनाने के लिए सल्फर डाई ऑक्साइड, चूना, कार्बन डाई ऑक्साइड जैसे कई रसायनों का प्रयोग किया जाता है। अधिक रसायन का प्रयोग शरीर को भी नुकसान पहुंचाता है। इसे दूर करने के लिए काफी रिसर्च की गई जिसमें शुगर टेक्नोलॉजी के सहायक आचार्य महेंद्र कुमार यादव व उनकी टीम अनुराग वर्मा व शालिनी वर्मा शामिल रहे। महेंद्र कुमार यादव ने बताया कि अर्जेंटीना में पाए जाने वाले पेड़ क्चेब्राचो की छाल से चूर्ण तैयार किया जाता है। इसका उपयोग टैनिन उद्योग में होता है। रायटन कंपनी ने इसे संस्थान को उपलब्ध कराया जिसका प्रयोग गन्ने के रस को शुद्ध करने के लिए किया गया। इसके लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई गई जिसका विकास संस्थान में हुआ है। छह माह के दौरान 1500 से अधिक प्रयोगशाला परीक्षण किए गए।