मां, जिसे त्याग, प्रेम और समर्पण की सबसे बड़ी प्रतिमूर्ति माना जाता है, वही मां जब जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनों से दूर कर दी जाती है तो यह समाज के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है। दामोदर नगर स्थित विद्याश्रम में रह रहीं 55 बुजुर्ग माताओं की कहानी मातृ दिवस पर भावुक कर देने वाली है। इन बुजुर्ग महिलाओं की लगभग सभी की संतानें हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने घरों से दूर वृद्धाश्रम में अकेले जीवन बिताने को मजबूर हैं। जिन आंखों ने अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हीं बच्चों ने उन्हें जीवन के इस दौर में सहारे की जगह अकेलापन दे दिया। विद्याश्रम में रहने वाली कई महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों से जुड़ी रही हैं। इनमें कुछ ऐसी माताएं भी शामिल हैं जिनके बच्चे दूसरे शहरों में रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में परिवार ने उन्हें बोझ मानकर अलग कर दिया। यहां तक कि एक प्रतिष्ठित समाजसेवी परिवार से जुड़ी महिला भी आश्रम में रह रही है।