जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को शहर को 2026 तक बाल श्रम मुक्त कराने के लिए नवीन सभागार सरसैय्या घाट पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कहा गया कि बाल श्रमिकों का स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन कराया जाएगा। व्यापारियों के सहयोग से बाजारों में बाल श्रमिकों के काम पर रोेक लगाई जाएगी। जगह-जगह स्टीकर लगाए जाएंगे। जिसमें बाल श्रम मुक्त प्रतिष्ठान लिखा जाएगा। श्रम विभाग के राज्य समन्वयक सैयद रिजवान अली ने बताया कि वर्ष 2027 तक प्रदेश के सभी जनपदों को बाल श्रम मुक्त करने का लक्ष्य है। जबकि चयनित शहरों को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त किया जाना है। उन्होंने कानपुर नगर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय और संयुक्त कार्यवाही की आवश्यकता पर बल दिया। सभी ईंट-भट्टों और अन्य प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों के पंजीकरण कराए जाने की अपील की। बैठक में व्यापार मंडल और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने आगामी दो महीनों में अपने अधीन व्यापार मंडलों को बाल श्रम नियोजित न करने का अभियान चलाने का आश्वासन दिया। साथ ही बाल श्रम मुक्त प्रतिष्ठान के स्टीकर लगाने का भी अभियान संचालित करने की बात कही। बाद में बाल श्रम जनजागरण रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर सहायक श्रमायुक्त राम लखन पटेल, अभय अवस्थी, उमेश गुप्ता, देवेंद्र प्रताप सिंह, आशीष मिश्रा, पवन कुमार, सुरेश सिंह, हेमंत कुमार, संतोष कुमार, मान सिंह, यशवीर सिंह, अनिल उपाध्याय, उमंग अग्रवाल, आदर्श अग्रवाल, शिवकुमार गुप्ता, सुरेश गुरनानी, प्रभात मिश्रा, दीपक कुमार मौर्या, इंदीवर जोशी, विनोद कुमार सिंह, शिवेन्द्र, जीशान अंसारी आदि थे।