मानव देह 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त होती है। हमें प्रभु को प्रत्येक क्षण स्मरण करते रहना चाहिए। यह शरीर सिर्फ खाने-पीने के लिए नहीं मिला है। मानव रूप में जन्म लेने का लाभ यही है कि नारायण की स्मृति बनी रहे। यह बातें किदवईनगर के ब्लाॅक स्थित श्री बांके बिहारी पार्टी हाल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को वृंदावन धाम से पधारे व्यास डॉ. संजय कृष्ण सलिल ने कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भभागवत कथा श्री हरि से मिलने का मार्ग बताती है। जब तक हम खान-पान और व्यवहार पर ध्यान नहीं देंगे तब तक हृदय शुद्ध नहीं होगा।