भीतरगांव व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और गहराते संकट ने ग्रामीण जनजीवन को एक बार फिर पुराने ढर्रे पर लौटने को मजबूर कर दिया है। कभी आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूट चुके मिट्टी के चूल्हे अब फिर से रसोई का हिस्सा बनने लगे हैं। मिट्टी के चुल्हों को ठेलिया में रखकर फेरी लगाने वाले ये 100 से 300 रुपये तक की कीमत पर बिक रहे हैं।