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कानपुर: सूख गई पांच गांवों की 'लाइफलाइन', पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे जंगली पशु

प्रसून शुक्ला Updated Sat, 23 May 2026 09:20 PM IST

कभी पांच गांवों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली बरईगढ़ झील अब पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गई है। भीतरगांव क्षेत्र में स्थित यह प्राकृतिक झील अब केवल गड्डों में बचे पानी तक सिमटकर रह गई है। झील सूखने से क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट गहराने लगा है और जंगली पशुओं के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई है। शनिवार दोपहर झील क्षेत्र में चारों ओर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। जहां पहले पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती थी, वहां अब वीरानी नजर आ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक झील में पानी खत्म होने के कारण नीलगाय, लोमड़ी, सियार और अन्य जंगली पशु भी इलाके से दूर चले गए हैं या पानी की तलाश में गांवों की ओर भटक रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानव हस्तक्षेप और लापरवाही के चलते झील का स्वरूप लगातार बिगड़ता गया। धीरे-धीरे जल स्रोत खत्म होते गए और अब स्थिति यह हो गई कि विशाल झील सूखकर छोटे-छोटे गड्डों में बदल गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि पास से गुजर रही रामगंगा नहर से झील में पानी छोड़ा जाए, ताकि झील का अस्तित्व बचाया जा सके और वन्यजीवों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में पर्यावरण और जल संकट और गंभीर हो सकता है।

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