लोकसभा में प्रधानमंत्री के झकझोर देने वाले संबोधन को सुनते समय आज से 27 साल पहले की 4 दिसंबर 1998 की वो तारीख भी याद आ गई। जब उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गायन अनिवार्य करने पर तत्कालीन बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र शुक्ल को बर्खास्त कर दिया गया था। वह भी तब जब केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। शुक्ल ने अपनी महत्वाकांक्षी कल्प योजना के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कर दिया था। इस पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। इतना ही नहीं उनके खिलाफ फतवा भी जारी हुआ। आदेश वापस लेने, न लेने को लेकर कई दिनों तक काफी जद्दोजहद हुई। अंततः 4 दिसंबर 1998 को आजाद भारत में पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम को अपेक्षित सम्मान दिलाने की कोशिश करने वाले वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की नगरी का 4 बार से लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे तत्कालीन बेसिक, प्रौढ़ व अनौपचारिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र शुक्ल बर्खास्त कर दिए गए। भाजपा सरकार के रहते यह सब हुआ।