विश्वविद्यालय कुलपति मुकेश कुमार ने बताया कि बाल संप्रेषण गृह के लिए क्या बेहतर हो सकता है। इस पर विश्वविद्यालय काम करेगा। इसका उद्देश्य यह है कि उसमें जो भी बालक या बालिकाएं हैं वह मुख्य धारा में आ सके। उनके अंदर कोई नेगेटिव फीलिंग है तो उसको पॉजीटिव थॉट में बदला जाए। इसके लिए विश्वविद्यालय महिला अध्ययन केंद्र और समाज कार्य विभाग शिक्षकों की टीम ललितपुर के राजकीय बाल संप्रेषण गृह में भेजी गई थी। निरीक्षण के दौरान सारी व्यवस्थाएं ठीक मिली। हम लोग टीचिंग, लर्निंग और काउंसलिंग के माध्यम से पढ़ाने का प्रयास करेंगे। वहां पर कुछ पुस्तकों की कमी है जिसको विश्वविद्यालय पूरी करेगा। समय-समय पर ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा मेडिटेशन, योग, पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी काम किया जाएगा। नेगेटिव थॉट को पॉजिटिव पर बदलने के साथ स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाएं इस पर भी काम किया जाएगा।