गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाल रोग ओपीडी में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ जाती है। इस रोग में बच्चों के लिए ओआरएस बेहद ही लाभकार होता है। लेकिन यदि इसको बनाने में गलती की तो इसका असर बच्चे पर उल्टा पड़ सकता है। ओआरएस बनाते समय पानी के अनुपात के साथ कई बातों पर ध्यान देना जरूरी है। मेडिकल कॉलेज झांसी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ ओम शंकर चौरसिया का कहना है गर्मियों में सबसे ज्यादा बच्चे डायरिया के शिकार होते हैं। इस समस्या से बचने के लिए बच्चों को ओआरएस घोल का देना चाहिए। दस्त में ओआरएस अमृत के समान होता है। लेकिन देखा गया है कि माता-पिता इसको ठीक से बनाते नहीं है। अक्सर थोड़े से ओआरएस में पानी मिलाकर बच्चे को दे दिया जाता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। सामान्यतः बाजार में दो तरह के ओआरएस आता हैं एक 200 एमएल का छोटा पैकेट और दूसरा 1 लीटर का बड़ा पैकेट। छोटा पैकेट हो या बड़ा पैकेट इसको एक बार पूरा बनाना चाहिए। इसमें पानी काे मिलाते समय अनुपात का ध्यान रखना चाहिए। इस तैयार घोल को थोड़ा लेते रहना चाहिए। इसको हम 12 घंटे तक रख सकते हैं।