सत्य बोलने वालों का सम्बंध जीवन मे कभी नहीं टूटता जीवन पर्यंत बना रहता है।उक्त बातें बीआरसी के बगल चल रहे नौ दिवसीय श्री राम कथा में कथा व्यास अयोध्या से पधारे स्वामी निर्मल शरण जी महराज ने कथा के दौरान कही।शिव और सती प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब सीता का भेष धारण कर सती राम की परीक्षा लेने गईं, तब राम ने सती को तुरंत ही पहचान लिया। उनको हाथ जोड़कर प्रणाम किया। अपना भेद खुल जाने पर मां सती लज्जित होते हुए वहां से अंतर्ध्यान होकर शिवजी के पास पहुंची। उधर शिवजी भी सती के इस कृत्य से दुखी हो जाते हैं और राम नाम का सुमिरन करने लगते हैं। तब सती ने शिवजी से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी।कथा के माध्यम से लोगों को सद्गुरु का सुमिरन करने की अपील।"राम नाम सुखदायी भजन कर भाई ये जीवन दो दिन का" के भजन से श्रोता मन्त्रमुग्ध हो गए।मुख्य यजमान पूर्व प्रधान नन्दलाल मोदनवाल द्वारा आरती व प्रसाद का वितरण किया गया।कार्यक्रम का संचालन शुभम सिंह ने किया।इस दौरान खजांची लाल,राजेश निगम भोला प्रसाद सेठ दिनेश गुप्ता सहित महिला व पुरुष श्रद्धालु रहे।