संघर्ष जब इरादों से टकराता है तो इतिहास बनता है। कुछ ऐसी ही कहानी है गोंडा के मेवतियान मोहल्ले के रहने वाले कुमार रितेश की जिन्होंने जीवन के सबसे कठिन दौर को पार कर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) परीक्षा 2024 में सफलता हासिल की। हितेश बताते हैं कि वर्ष 2020 में उन्होंने पूरी लगन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी लेकिन तभी कोरोना महामारी ने उनके जीवन को झकझोर कर रख दिया। 2021 में पूरा परिवार संक्रमण की चपेट में आ गया और इसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा आघात था। घर की जिम्मेदारियां बढ़ गईं और पिता अकेले रह गए, ऐसे में बाहर जाकर पढ़ाई करना संभव नहीं रहा लेकिन हालातों के आगे झुकने के बजाय हितेश ने घर को ही अपनी ताकत बना लिया। सीमित संसाधनों और मानसिक पीड़ा के बावजूद उन्होंने सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया और लगातार मेहनत करते रहे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर पद पर हो गया। परिणाम घोषित होने के बाद घर में खुशी और गम का मिला-जुला माहौल देखने को मिला। पिता रवि श्रीवास्तव अपने बेटे की सफलता पर भावुक हो उठे। कैमरे के सामने उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, “आज बेटे ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन उसकी मां हमारे बीच नहीं है, यही सबसे बड़ी कमी खल रही है।” हितेश की यह कहानी न सिर्फ सफलता की मिसाल है बल्कि यह भी बताती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसला कायम रहे तो मंजिल जरूर मिलती है। जिले के अन्य मेधावियों के परिवारों में भी इस सफलता को लेकर खुशी का माहौल है।