सरयू नदी का जलस्तर बुधवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। यहां जलस्तर 106.460 मीटर रहा, जबकि खतरे का निशान 106.070 मीटर है। हालांकि जलस्तर में कमी का रुख है। प्रभारी मंत्री आशीष पटेल बुधवार दोपहर बाढ़ प्रभावितों से मिलकर राहत सामग्री वितरित करेंगे। वहीं अयोध्या में सरयू का जलस्तर 93.100 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.730 मीटर से 37 सेंटीमीटर ऊपर है। यहां जलस्तर बढ़ रहा है। बैराजों से कुल 3,33,866 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें गिरिजा बैराज से 1,83,738, शारदा बैराज से 1,49,878 और सरयू बैराज से 250 क्यूसेक पानी शामिल है। सीडीओ दयानंद प्रसाद ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए प्रशासन की टीमें लगातार काम कर रही हैं। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। घरों में पानी, बिजली भी गुल ऐली परसौली के 23 मजरों में करीब 860 परिवारों के 4,575 लोग प्रभावित हैं। गढ़ी की करीब 2,000, जबरनगर की 1,500 और परास मझवार की करीब 700 आबादी भी बाढ़ के पानी से घिरी है। कई घरों में पानी पहुंचने के साथ बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। बाढ़ के पानी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी धान की फसलें पानी में डूब गई हैं। लगातार जलभराव से फसल बर्बाद होने का खतरा है। वहीं मवेशियों के लिए चारे का संकट भी गहराने लगा है। ग्रामीण किसी तरह चारे और जरूरी सामान की व्यवस्था कर रहे हैं। घर-घर पहुंचाया जा रहा भोजन बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है। अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। ऐली परसौली स्थित बाढ़ केंद्र पर पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। लंच पैकेट तैयार कर घर-घर पहुंचाए जा रहे हैं। ढेमवा घाट पर दो और नावें बढ़ाने की मांग दत्तनगर के ढेमवा घाट पर रोजाना हजारों लोग नदी पार कर रहे हैं। यहां संचालित तीन सरकारी नावें भीड़ के मुकाबले अपर्याप्त साबित हो रही हैं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इसी बीच कुछ निजी नाव चालक रुपये लेकर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के लोगों को नदी पार करा रहे हैं। घाट पर मौजूद प्रमोद, पवन और रेशमा ने बताया कि वे एक घंटे से नाव का इंतजार कर रहे हैं। नाव चालक दुखहरण ने बताया कि भीड़ अधिक होने के कारण खाने-पीने तक का समय नहीं मिल पाता। ठेकेदार आलोक कुमार ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए दो और नावों की जरूरत है।