अमराडीहा शाहपुर गनवरिया में शनिवार रात घर में घुसे चमैनिया दिखलौल निवासी चंद्रशेखर तिवारी (26) की चोर समझकर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। गंभीर हालत में पुलिस उसे मेडिकल कॉलेज ले गई। जहां से लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर फोरेंसिक टीम बुलाकर साक्ष्य एकत्र किया है। शनिवार रात करीब एक बजे गनवरिया निवासी कृष्ण मोहन मिश्र अपने परिवार के साथ सो रहे थे। इस दौरान चमैनिया दिखलौल निवासी चंद्रशेखर उनके घर में घुस आए। लोगों की नींद टूटी तो शोर-शराबा सुनकर वहां गांव के अन्य लोग भी आ गए। इसके बाद चोर समझकर लोग हमलावार हो गए। पीड़ित पृथ्वीनाथ तिवारी ने आरोप लगाया कि कृष्णमोहन मिश्र ने अपने भाईयों शेष नारायण मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र और अनिल मिश्र के साथ मिलकर उनके भाई चंद्रशेखर तिवारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। वहां सूचना पर आई पुलिस गंभीर हालत में चंद्रशेखर को पहले इटियाथोक सीएचसी ले गई। डॉक्टरों ने गोंडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जहां प्रारंभिक उपचार के बाद हालत में कोई सुधार न होने पर लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ ले जाते समय रास्ते में चंद्रशेखर की मौत हो गई। प्रभारी निरीक्षक शेषमणि पांडेय ने बताया कि मृतक के भाई पृथ्वीनाथ तिवारी की तहरीर पर गनवरिया निवासी कृष्ण मोहन मिश्र, शेषनारायण मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र और अनिल मिश्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस व फोरेंसिक टीम ने घटना साक्ष्य एकत्र करने के साथ ही लाठी-डंडे समेत प्रयुक्त हथियार बरामद किया है। चंद्रशेखर का चल रहा था इलाज पिता राम प्रसाद ने बताया कि उनके सबसे बड़े बेटे चंद्रशेखर पिछले तीन सालों से मानसिक तौर पर बीमार रहते थे। उनका गोरखपुर से इलाज चल रहा था। कभी-कभी वह घर से बिना बताए निकल जाते थे। उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। प्रभारी निरीक्षक शेषमणि पांडेय ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच पड़ताल की जा रही है। रो-रोककर परिजनों का रहा बुरा हाल मृतक चंद्रशेखर अपने चार भाईयों व दो बहनों में सबसे बड़े थे। परिवार में पिता राम प्रसाद के अलावा मां जनकदुलारी हैं। बड़े बेटे की मौत के बाद मां जनकदुलारी बदहवास हो गईं। वहीं, पिता राम प्रसाद और भाई व बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसी तरह से रिश्तेदार व परिजनों ने संभाला है। एफआईआर के लिए अड़े रहे परिजन मौत के बाद चंद्रशेखर का शव उनके घर लाया गया। इसके बाद पुलिस पंचनामा भरने के लिए पहुंची तो लोग आक्रोशित हो गए। उनका कहना था कि प्रथमसूचना रिपोर्ट कॉपी मिलने के बाद पंचनामा की कार्रवाई में सहयोग करेंगे। हालांकि पुलिस के समझाने के बाद राजी हो गए।