धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं को सहेजे भगवान वाराह के अवतार की भूमि पसका सूकरखेत में सोमवार की भोर से ही श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पूजन अर्चन कर स्नान दान किया। मुख्य स्नान पर्व पर गोंडा के साथ ही कई जिलों के श्रद्धालु यहां स्नान-दान कर रहे हैं। मेले में बड़ी संख्या में झूले, सर्कस के साथ ही घरेलू सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन व खानपान की दुकानें सज गई हैं। मुख्य स्नान के बाद कल्पवास समाप्त हो जाएगा। संपूर्ण मेला क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ गई है। साधु-संत सुबह-शाम रामधुन कर रहे हैं। इससे संगम क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया है। हस्तलिखित रामायण के पन्ने दे रहे गवाही मान्यता है कि राजापुर सूकरखेत में ही श्रीरामचरित मानस के प्रणेता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म हुआ था। सूकरखेत में तुलसीदास जी के गुरु नरहरिदास जी का आश्रम भी है। कहते हैं तुलसीदास जी ने इसी पुण्य भूमि पर अपने गुरु से दीक्षा प्राप्त की थी। उनके गुरु के आश्रम में आज भी हस्त लिखित रामायण के पन्ने इस स्थान की ऐतिहासिकता की गवाही दे रहे हैं। सुरक्षा के चौकस प्रबंध एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। एक सीओ, 20 उपनिरीक्षक, 80 मुख्य आरक्षी व आरक्षी, 25 महिला आरक्षियों के साथ ही आठ ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। अस्थायी रेडियो कंट्रोल स्थापित किया गया है। मेला क्षेत्र में ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है। प्रभारी निरीक्षक दिनेश सिंह ने बताया कि मेलास्थल के प्रवेश द्वारों पर पांच बैरियर लगाए गए हैं। इन पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। सिविल ड्रेस में भी पुलिसकर्मी लगाए गए हैं।