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गोंडा मेडिकल कॉलेज में बिस्तर पर तड़पता रहा राम सेवक, दो महीने में सिर्फ दो बार देखने पहुंचे डॉक्टर

अस्पताल जीवन बचाने की जगह होता है, लेकिन मेडिकल कॉलेज, गोंडा के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती बुजुर्ग रामसेवक के लिए यह इंतजार और बेबसी का ठिकाना बन गया। करीब दो महीने तक वह बिस्तर पर प्यास और लाचारी से तड़पता रहा। आरोप है कि इस दौरान डॉक्टर सिर्फ दो बार उसे देखने पहुंचे। जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसकी हालत देखी तो उसे पानी पिलाया, वीडियो बनाया और शिकायत की। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया, लेकिन तब तक यह मामला मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर चुका था। डिहाइड्रेशन की हालत में 20 अप्रैल को रामसेवक को सामाजिक कार्यकर्ता मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। चिकित्सकों ने भर्ती कर इलाज शुरू किया। 22 अप्रैल को आईवी फ्लूड और दवाएं लिखी गईं। इसके बाद 23 और 30 अप्रैल को डॉक्टर वार्ड में पहुंचे, लेकिन आरोप है कि उसके बाद करीब दो महीने तक किसी चिकित्सक ने मरीज की सुध नहीं ली। करीब दो महीने बाद सामाजिक कार्यकर्ता अंशु अग्रवाल अस्पताल पहुंचे तो रामसेवक पानी के लिए तड़पता मिला। उन्होंने उसे पानी पिलाया और पूरी घटना का वीडियो बनाकर सीएमओ को शिकायत भेजी। वीडियो वायरल होने के बाद 22 जून को एक जूनियर रेजीडेंट मरीज को देखने पहुंचा, लेकिन उसके बाद भी नियमित चिकित्सकीय निगरानी नहीं हुई। मामले में सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार किया। हालांकि, फोन पर उन्होंने कहा कि मरीज को इलाज से ज्यादा शरणालय की जरूरत है। वहीं, मरीज की बीएचटी में दर्ज उपचार और वार्ड में उसकी दयनीय हालत मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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