बदलती जीवनशैली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों के संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण में मां की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चे का पहला विद्यालय परिवार और पहली शिक्षिका मां होती है। यदि बचपन में सही संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक माहौल मिले तो बच्चे का भविष्य मजबूत बनता है। यह बातें शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शास्त्रीनगर स्थित सिटी मॉन्टेसरी पब्लिक स्कूल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में सामने आईं। बच्चे के विकास और चरित्र निर्माण में माताओं की भूमिका विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रतिमा श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व की नींव घर से पड़ती है। माता-पिता का व्यवहार और पारिवारिक वातावरण ही बच्चों के भविष्य की दिशा तय करता है।