महाराजगंज के सेमरा ग्राम स्थित एक स्कूल में श्रीगंगा आश्रम की ओर से मानव धर्म प्रसार सम्मेलन और व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर माधव कृष्ण ने कहा कि धर्म का अर्थ सत्य, न्याय, धर्म की स्थापना है। धर्म का तत्व इतना गूढ़ है कि इसे किताबों, प्रवचनों, तर्क, मेधा से नहीं समझा जा सकता है। ये सभी धर्म के विषय में एक संकेत छोड़ देते हैं, लेकिन धर्म का समग्र परिचय नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म का मूल लक्षण है धैर्य। इसलिए धन कमाने, नाम कमाने, यश कमाने के लिए लोग समय लेते हैं, धैर्य का परिचय देते हैं। जल्दी से सब कुछ पा लेने की इच्छा रखने वाले कभी धार्मिक नहीं हो सकते हैं। जल्दी से सब कुछ पा लेने का समय चल रहा है इसलिए राजनेता, साहित्यकार, व्यापारी, अधिकारी, साधु अपने कर्त्तव्य मार्ग से भटक चुके हैं। सब कुछ अपने लिए संचय करने की प्रवृत्ति रखने वाले लोग समाज के नहीं हो सकते। इसलिए ऐसे भ्रष्ट लोगों से मित्रता, उनके साथ रोटी, बेटी या मंच का संबंध रखने वाले लोग स्वयं अपराधी या भ्रष्ट हो जाते हैं। कुसंग का ज्वार सबसे अधिक भयानक होता है। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि अहिंसा परम धर्म है लेकिन उनका समूचा ग्रंथ धर्म स्थापित करने के लिए हिंसा से भरा हुआ है। इसलिए सत्य और न्याय के लिए लड़ना भी होगा, प्रतिरोध भी करना होगा।