भाकपा माले ने शनिवार को संभल हिंसा पर सवाल उठाते हुए इसे प्रायोजित बताया और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन कलक्ट्रेट में सौपा। दिए गए ज्ञापन में संगठन की ओर से कहा गया है कि यूपी के संभल में हुई हिंसा भारत के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताने-बाने को नष्ट करने का एक प्रयास है। ज्ञानवापी और जन्य स्थलों पर देखे गए पैटर्न के बाद, संभल में यह दावा करके विवाद पैदा किया गया कि 16 वीं शताब्दी की जामा मस्जिद पहले एक मंदिर थी। पांच दिन पूर्व एक सर्वेक्षण होने के बावजूद, 24 नवंबर को दूसरा सर्वेक्षण शुरू किया गया। यह पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का स्पष्ट उल्लंघन है जो प्रत्येक धार्मिक पूजा स्थल की 15 अगस्त 1947 की स्थिति की गारंटी देता है।