रामनगर से पड़ाव तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने के बाद मलबा हटाने जेसीबी लेकर पहुंचे अधिकारियों को चौरहट गांव के लोगों ने बैरंग वापस लौटा दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने खूब हो हल्ला किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनके मकानों को तोड़ा गया है। जब तक उसकी क्षतिपूर्ति नहीं दी जाती है काम नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए अधिकारी बैरंग वापस लाैट आए। पड़ाव से रामनगर तक फोर लेन निर्माण के लिए पिछले दिनों ने सड़क के किनारे के भवनों को जेसीबी से गिरा दिया था। बिना मुआवजा दिए मकानों को गिराने के दौरान कई ऐसे मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए जो अतिक्रमण की जद में नहीं थे। इसको लेकर लोगों में आक्रोश है। इस मुद़्दे को लेकर ग्रामीणों ने मंगलवार को हो हल्ला किया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को तहसीलदार राहुल ओर लोक निर्माण विभाग वाराणसी के सहायक अभियंता जितेन्द्र सिंह ने ग्रामीणों संग बैठक कर वार्ता की। तय हुआ कि आबादी के जमीन का मुआवजा नहीं दिया जाएगा केवल भवन का मुआवजा दिया जाएगा। चौड़ीकरण की जद में आ रहे पांच गांव के 219 भवन स्वामियों को मुआवजा देने की सहमति बनी थी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने उनके बैंक पासबुक, भूमि से संबंधित कागजात, आधार कार्ड की कापी आदि ली है। बावजूद इसके मुआवजा नहीं दिया गया। दूसरी तरह शाम के वक्त बुल्डोजर लेकर अभियान चलाने के नाम पर उनके मकानों को तोड़ा जा रहा है। समझौता होने के बाद शुक्रवार की शाम चार बजे एक बार फिर नायब तहसीलदार अमित सिंह की नेतृत्व में तोड़े गए मकानों का मलबा हटाने पहुंचे। इसको देखते ही चौरहह, भोजपुर गांव के ग्रामीणों ने हो हल्ला शुरू कर दिया। कहा कि जब तक हम पीड़ितों को क्षतिपूर्ति नहीं दी जाती तब तक हम लोग कार्य नहीं होने देंगे। काफी हो हल्ला के बाद नायब तहसीलदार अमित सिंह ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया और काम रोक दिया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए।