केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की अखिल भारतीय आम हड़ताल के समर्थन में चंदौली जिले के विभिन्न हिस्सों में वामपंथी दलों और उनसे जुड़े जन संगठनों ने बुधवार को ज़ोरदार प्रदर्शन किया। जिले भर में जुलूस, मार्च और सभाओं के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर, किसान, शिक्षा व जन विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने “चार श्रम संहिताएं रद्द करो, ठेका प्रथा बंद करो, निजीकरण पर रोक लगाओ, सरकारी संपत्ति बेचना बंद करो” जैसे नारों के साथ विरोध जुलूस निकाला। चकिया, सकलडीहा और जिला मुख्यालय पर अलग-अलग जगहों से निकले जुलूसों का समापन जनसभा में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर, किसान, महिलाएं, युवा और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग शामिल हुए। चकिया में दो अलग-अलग स्थानों से भाकपा (माले) और माकपा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा (डुही-सुही) और काली पोखरा से निकले ये जुलूस गांधी पार्क पहुंचकर एकजुट हुए, जहां संयुक्त सभा का आयोजन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि चार लेबर कोड मजदूर वर्ग के ऐतिहासिक अधिकारों पर हमला हैं और इन्हें पूंजीपतियों के हित में लाया गया है। उन्होंने सरकार से इन कोडों को पूरी तरह वापस लेने और पूर्ववर्ती श्रम कानूनों की पुनः स्थापना की मांग की।सकलडीहा तहसील मुख्यालय पर पहले से चल रहे अनिश्चितकालीन धरना स्थल से निकले जुलूस ने नगर भ्रमण किया और पुनः धरना स्थल पहुंचकर सभा की।नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी जमकर हमला बोला। कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला आम जनता के हित में नहीं है। बिजली महंगी होगी, आरक्षण खत्म होगा, और लाभ निजी कंपनियों को मिलेगा।उन्होंने मांग की कि 200 यूनिट बिजली गरीबों को मुफ्त दी जाए, स्मार्ट मीटर योजना रद्द हो, और फर्जी बिजली बिलों पर रोक लगाई जाए।