वामपंथियों ने बृहस्पतिवार को वन विभाग के खिलाफ मार्च निकाला। उनकी मांग थी कि वामपंथियों, दलितों व गरीबों को वन भूमि से न उजाड़ा जाए। भाकपा कार्यकर्ताओं ने गढ़वा, केराडीह, सपही, शेरपुर रसिया सहित तमाम गांव में बसकर खेती करते आ रहे लोगों को उजाड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाओ, वनाधिकार कानून के तहत दावा दाखिल करने वाले सभी दावेदारों को उनके जमीन का मालिकाना हक दो, गढ़वा गांव सहित तमाम गांव को राजस्व गांव का दर्जा दो, पुरानाडीह में लहलहाती फसल को बर्बाद करने वाले चंद्रप्रभा रेंजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करो, वन विभाग की मनमानी नहीं चलेगी आदि नारे लगाया। साथ ही चकिया, राजपथ और चंद्रप्रभा रेंज के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गांधी पार्क में सभा की। भाकपा (माले), किसान महासभा, खेग्रामस, आर वाईए व एपवा के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। सभा में भाकपा (माले) राज्य स्थाई समिति सदस्य अनिल पासवान ने कहा कि वनाधिकार कानून से तहत पूरे चकिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत हजारों दावे दाखिल किए गए हैं। जो इस बात को दर्शाता है कि इलाके के तमाम वनवासी, दलित गरीब तथा अन्य परंपरागत वननिवासी शिकारगंज क्षेत्र के गढ़वा से लेकर चकिया तहसील क्षेत्र के सपही, केराडीह शेरपुर रसिया लोना जंगल सहित तमाम जगह पर बसे हुए हैं और खेती करते आ रहे हैं जिन्हें वन विभाग लगातार उजाड़ने की धमकी दे रहा है, यह प्रतिवाद मार्च वन विभाग के इस व्यवहार के खिलाफ है। सभा में तहसील क्षेत्र प्रभारी विजई राम, रामवचन वनवासी, रमेश चौहान,सुनैना कुमारी, कतवारु वनवासी आदि ने संबोधित किया।