मानसून की पहली बारिश के साथ ही जिले के जर्जर पुल-पुलिया लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गए हैं। जिले में 70 साल पुराने 20 से अधिक पुल और पुलियां ऐसी हैं, जिनकी रेलिंग टूट चुकी है, सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हैं और कई स्थानों पर स्लैब भी दरक चुके हैं। इन पुल-पुलियों से प्रतिदिन तीन हजार छोटे-बड़े वाहन और स्कूली बच्चे, किसान और राहगीर मिलाकर दो हजार से ज्यादा लोग गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम बदहाल हैं। बारिश के दौरान फिसलन और तेज जल प्रवाह के कारण यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।