पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को हर तरफ सराहा जा रहा है। पाकिस्तानी के आतंकी अड्डों पर भारतीय सेना के जबरदस्त हमलों से लोगों में जोश भर गया है। पूर्व सैनिकों ने इसे सरकार व सेना की सही समय पर की गई सटीक कार्रवाई बताते हुए सराहना की है। वहीं आतंकियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई को आपरेशन सिंदूर का नाम दिए जाने को लेकर भी जबरदस्त प्रतिक्रिया सुनने को मिली है। लोगों का कहना है कि एक नव विवाहिता के पति की हत्या कर आतंकी ने उससे कहा था कि मोदी को जाकर बता देना तो उसका एक चुटकी सिंदूर बारूद बनकर आतंकियों के सफाए में जुट गया है। आतंकियों को भारत के हवाले करे पाकिस्तान देवा रोड निवासी पूर्व सैनिक कल्याण निगम उपाध्यक्ष रह चुके व मौजूदा समय विजय फंड समिति उत्तर प्रदेश के सदस्य पूर्व सैनिक शिव करन सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान न गलत करता है न सहता है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई पाकिस्तान के सफाए का संदेश है। पाकिस्तान की जनता यदि अपनी बर्बादी से बचना चाहती है तो वह आतंकियों को भारत के हवाले करे अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान के चिथड़े उड़ जाएंगे। पाकिस्तान ने चूहे की तरह की शेर को छेड़ने की नादानी वर्ष 1965 व 1971 में पाकिस्तान की सेना को घुटने टेकने पर विवश करने वाली भारतीय सेना में तत्कालीन सूबेदार मेजर रहे नगर के गोकुल नगर के भवानी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान की दोनों युद्धों में करारी हार देखी है। वर्ष 1971 में जिस तरह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए निर्णय लिया था, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय सेना को मौका देकर पाकिस्तान को उसकी औकात बताने का काम किया है। भारतीय सेना ने जिस तरह नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया वह इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान ने उस चूहे जैसी नादानी की जिसने शेर को छेड़ने की जुर्रत की थी। शेर ने जबड़ा खोला तो वह उसके अंदर चला गया। पाकिस्तान ने पहलगाम में निर्दोष लोगों को मारा, नवविवाहिता के सिंदूर को मिटाकर मोदी सरकार को चुनौती दी, उसका जवाब एक शेर की तरह मोदी सरकार ने आपरेशन सिंदूर के जरिए दिया।