बाराबंकी में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में कई पुराने पारिवारिक और वित्तीय मामलों का समाधान कराया गया। अदालत की पहल से दो दर्जन से अधिक दंपतियों को समझा-बुझाकर फिर से साथ रहने के लिए घर भेजा गया। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण लेने वाले किसानों के कई मामलों को भी कम राशि में आपसी सहमति से निपटाया गया। जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव ने कहा कि लोक अदालत किसी साधारण अदालत की तरह नहीं बल्कि एक महायज्ञ की तरह है, जिसमें सभी की भागीदारी और सहयोग आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि ऐसे मंच पर आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर लोगों को राहत दी जाती है। लोक अदालत में कई ऐसे मामले भी सामने आए जो वर्षों से अदालतों में लंबित थे। इनमें एक साल से लेकर 21 साल तक पुराने पारिवारिक विवाद शामिल थे। लखनऊ के मड़ियांव निवासी महफूज और कोठी थाना क्षेत्र की रहने वाली उनकी पत्नी शबाना बानो का मामला भी इनमें प्रमुख रहा। दोनों के बीच पिछले 21 वर्षों से चल रहा विवाद लोक अदालत में सुलह के साथ समाप्त हो गया। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों और मध्यस्थों ने दोनों पक्षों को समझाकर समझौता कराया, जिसके बाद दंपति ने साथ रहने का निर्णय लिया। लोक अदालत में हुए ऐसे समझौतों से न केवल लोगों को लंबे मुकदमों से राहत मिली, बल्कि परिवारों में भी फिर से खुशियां लौट आईं।