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बाराबंकी-छपरा रेलखंड पर चार लाइन बिछाने की डीपीआर मंजूर, 190 ट्रेनों की बढ़ेगी रफ्तार और क्षमता

देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल बाराबंकी-छपरा रेलखंड को रेलवे जल्द ही नई पहचान देने जा रहा है। करीब 425 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर चार रेलवे लाइन बिछाने की परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस फैसले से न सिर्फ रेल संचालन की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि बाराबंकी समेत पूरे अवध और पूर्वांचल क्षेत्र के यात्रियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। बाराबंकी जंक्शन पूर्वोत्तर रेलवे का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री विभिन्न शहरों के लिए सफर करते हैं। वर्तमान में इस रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव इतना अधिक है कि कई बार एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए ट्रेनों को स्टेशनों पर रोकना पड़ता है। चार लाइन बनने के बाद इस समस्या में काफी कमी आने की उम्मीद है। रेलवे सूत्रों के अनुसार इस रेल मार्ग पर प्रतिदिन करीब 190 ट्रेनों का संचालन होता है। बढ़ते यात्री और माल यातायात को देखते हुए रेलवे ने दो वर्ष पहले इस परियोजना का सर्वे शुरू कराया था। सर्वेक्षण के बाद तैयार डीपीआर को अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिल गई है, जिससे परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इस रूट पर तीसरी लाइन बिछाने का कार्य पहले से चल रहा है। अब तक करीब 80 किलोमीटर रेलखंड पर तीसरी लाइन का निर्माण पूरा किया जा चुका है। बाराबंकी जिले के बुधवल से गोंडा के बीच का हिस्सा भी इसमें शामिल है। इससे इस क्षेत्र में रेल यातायात प्रबंधन पहले से बेहतर हुआ है। बाराबंकी कृषि उत्पादन, खाद्यान्न, चीनी उद्योग और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों के कारण माल परिवहन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण जिला है। रेल मार्ग की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुगम होगा, जिससे उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। भविष्य में माल परिवहन की लागत कम होने और समय की बचत की भी संभावना है।

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