स्थानीय धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथावाचिका मंजूलता ने राम विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिमय वर्णन किया। आज के प्रसंग में भगवान श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथावाचिका ने बताया कि जनकपुरी में आयोजित स्वयंवर में भगवान श्रीराम ने भगवान शिव के धनुष को तोड़कर माता सीता का वरण किया। इस दिव्य प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्चा प्रेम, मर्यादा और धर्म का पालन ही जीवन का आधार है। राम-सीता विवाह केवल एक वैवाहिक आयोजन नहीं, बल्कि आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन का सर्वोत्तम उदाहरण है। वहीं माता सीता का चरित्र धैर्य, समर्पण और पतिव्रता धर्म की प्रेरणा देता है। कथा के माध्यम से श्रोताओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन में संयम, संस्कार और धर्म का पालन करना चाहिए। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरे वातावरण में जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठी। इस अवसर पर रतन अग्रवाल, चेयरमैन डॉ. उमाशंकर वैश्य, अनिल अग्रवाल, सुशील बंसल, बलराम मिश्रा, कृष्णामोहन सिंह, रामचंद्र अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, बंटी अग्रवाल, नरेश मित्तल, महेश मित्तल, गोपाल अग्रवाल, रामकुमार वर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।