भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सीमा पिलरों एवं नो मेंस लैंड से संबंधित विषयों पर नेपाल में सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल की संयुक्त एफएसटी (फील्ड सर्वे टीम) बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा पिलरों की वर्तमान स्थिति, क्षतिग्रस्त एवं मिसिंग पिलरों के सत्यापन तथा उनकी मरम्मत एवं पुनर्स्थापना को लेकर विस्तार से चर्चा की।16 जून से पहले भी बैठक हो चुकी है। 42वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट गिरीश चंद्र पाण्डेय ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा के कुछ क्षेत्रों में नेपाल की राप्ती नदी का बहाव होने के कारण बरसात के मौसम में सीमा पिलरों को नुकसान पहुंचता है। नदी के कटाव और जल प्रवाह के कारण कुछ पिलर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जबकि कुछ पिलर मिसिंग श्रेणी में दर्ज हो जाते हैं। ऐसे सभी पिलरों के स्थान पूर्व से चिन्हित हैं और उनका अभिलेख उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीमा क्षेत्र में लगभग 12 सीमा पिलर क्षतिग्रस्त अथवा मिसिंग हैं। इन पिलरों के सत्यापन, मरम्मत एवं पुनर्स्थापना का कार्य सर्वे टीम द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इस समय भारत-नेपाल सीमा की बॉर्डर पिलर सर्वे टीम पड़ोसी जिले श्रावस्ती में कार्यरत है। श्रावस्ती में कार्य पूर्ण होने के बाद अगले चरण में बहराइच जनपद में सर्वे एवं मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। कमांडेंट ने बताया कि 42वीं वाहिनी के कार्यक्षेत्र में आने वाले सभी सीमा पिलरों की नियमित निगरानी की जाती है। सशस्त्र सीमा बल के जवान सीमा पर लगातार गश्त करते हैं तथा नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के साथ संयुक्त गश्त भी नियमित रूप से की जाती है। इससे सीमा क्षेत्र में सुरक्षा एवं समन्वय बना रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-नेपाल सीमा पर सीमा पिलरों को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। दोनों देशों की सर्वे एजेंसियां और सुरक्षा बल आपसी सहयोग एवं समन्वय के साथ सीमा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।