यूपी के बहराइच में भारत-नेपाल सीमा पर रुपईडीहा चेकपोस्ट पर एसएसबी की 42वीं वाहिनी की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और देहात इंडिया संस्था की टीम ने दो नेपाली युवतियों को संदिग्ध परिस्थितियों में रोका। पूछताछ और सत्यापन के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मानव तस्करी की आशंका जताई गई। इनमें 19 वर्षीय युवती को आगे की कार्रवाई के लिए नेपाल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया, जबकि 17 वर्षीय नाबालिग को सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए नेपाल की सहयोगी एनजीओ को सौंपा गया। एसएसबी 42वीं वाहिनी के कमांडेंट गिरीश चंद्र पांडेय के अनुसार, शनिवार रात करीब 9:45 बजे नेपाल से दो नेपाली युवतियां रुपईडीहा चेकपोस्ट पहुंचीं। चेकिंग के दौरान दोनों ने अपने पहचान-पत्र प्रस्तुत किए। स्क्रीनिंग में उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर समवाय प्रभारी को सूचना दी गई। इसके बाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और देहात इंडिया की टीम की मौजूदगी में दोनों से पूछताछ की गई। पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे दिल्ली/गाजियाबाद जा रही थीं। 19 वर्षीय आशिका नेपाली ने शुरुआत में बताया कि वह अपनी भाभी सोनू नेपाली की देखभाल के लिए गाजियाबाद जा रही है। बताया गया कि सोनू कथित तौर पर अभि की पत्नी है और गर्भवती है। सत्यापन के लिए टीम ने अभि से फोन पर संपर्क किया। उसने बताया कि वह गाजियाबाद में रहता है और एक रेस्टोरेंट में काम करता है। उसके अनुसार, पत्नी सोनू के गर्भवती होने के कारण आशिका उसकी देखभाल के लिए गाजियाबाद आ रही थी। हालांकि, जब अभि से सोनू से बात कराने को कहा गया तो उसने बताया कि दोनों मोबाइल फोन उसके पास हैं और वह कार्यस्थल पर है, जबकि उसकी पत्नी घर पर है। इसके बाद आशिका के मोबाइल से सोनू से संपर्क कराया गया। पूछताछ के दौरान सोनू ने गर्भवती होने की बात से इनकार कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि सोनू का मोबाइल नंबर आशिका के फोन में 'मम्मी' नाम से सेव था। टीम ने दोनों युवतियों से उनके माता-पिता से संपर्क कर सत्यापन कराने को कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। दोनों ने बताया कि वे माता-पिता को बिना बताए नेपाल से निकली थीं। जांच के दौरान आशिका के मोबाइल में मौजूद व्हाट्सऐप चैट और वार्तालाप में एक वॉयस नोट भी मिला। इसमें एक पुरुष द्वारा काठमांडू से दोनों का टिकट बुक कराने की बात कही गई थी। आगे की जांच में पता चला कि बस की टिकट अभि ने बुक की थी।