मिहींपुरवा बहराइच तराई का प्राकृतिक जंगल कतर्नियाघाट की अमिट छाप विदेशियों पर ऐसी पड़ी कि वह कहने लगे अदभुत है कतर्निया सभी को आना चाहिए। कतर्निया और बहुत कुछ खास है इस जंगल में-- कतर्नियाघाट का जंगल बाघ तेंदुआ के साथ-साथ हाथी रिजर्व भी घोषित है और हाथियों के संरक्षण पर कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में काम कर रही नेचर इन्वायरनमेंट वाइल्डलाइफ सोसायटी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक के साथ इस सोसायटी को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाले विदेशी फ्रांस निवासी सितांशु दास, अरविन्द राजा जैनुल आदि कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के किनारे बने कतर्निया वाइल्ड हैवेन में रूक कर कतर्नियाघाट का दीदार किया। जंगल सफारी के दौरान बाघ, तेंदुआ, हाथी, चीतल, आदि दुर्लभ पक्षियों का दीदार कर रोमांचित हो उठे। जंगल सफारी के दौरान बाघ और दुर्लभ पक्षियों को देखकर तस्वीर अपने कैमरे में कैद कर ली। तस्वीर साझा करते हुए अपना अनुभव भी साझा किया और बताया कि कतर्नियाघाट में पर्यटकों के लिए बहुत कुछ है बस वह धैर्य रखकर जंगल सफारी करें और दुर्लभ वन्य जीवों का दीदार करते हुए कतर्नियाघाट के जंगल को निहारते रहे। वन निगम के अनुभाग अधिकारी अक्षत सिंह ने कहा कि इस पर्यटन सत्र में अभी पर्यटकों की संख्या सीमित है। पर्यटक विभागीय गेस्ट हाउस के साथ साथ प्राइवेट गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम कर रहे हैं फिर भी कोई पर्यटक निराशा नही हो रहा है। सभी पर्यटकों को जंगल में रहने वाले बाघ, तेंदुआ, चीतल समेत कई दुर्लभ वन्य जीवों के दर्शन हो रहे हैं और पर्यटक अपनी कतर्नियाघाट की यात्रा को सुखद मान रहें हैं।