अयोध्या में कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा की ओर से जिले में तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप, तिलहन का रकबा बढ़ाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सरसों की उन्नत किस्म आरएच 725 का प्रदर्शन मवई, रुदौली, सोहावल, पूराबाजार, बीकापुर, तारुन और मयाबजार सहित विभिन्न विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में किया गया है। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. बीपी शाही तथा वैज्ञानिक पंकज कुमार सिंह ने सोहावल ब्लॉक के ग्राम कुडौली (मजनावां) और रुदौली ब्लॉक के ग्राम गोहना विकास में कृषक प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को सरसों की प्रजाति आरएच 725 की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह किस्म 140-145 दिनों में पक जाती है और प्रति एकड़ 10-11 क्विंटल तक उत्पादन दे सकती है। इसके दाने मोटे और फलियां भी मोटी होती हैं। किसानों ने भी इस प्रजाति को लगाने से उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी आने की उम्मीद जताई है। किसानों को कीटों और रोगों से बचाव के लिए भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। फूल और फलियों पर छोटे कीट दिखाई देने पर इमिडाक्लोरोपिड 17.8 एसएल (1 मिली प्रति 3 लीटर पानी) या डाईमेथोएट 30 ईसी (1 मिली प्रति लीटर पानी) के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई। सफेद रतुआ रोग के लक्षण दिखने पर मेटालेक्सिल 8% और मैंकोजेब 64 डब्लूपी (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव प्रभावी होगा। फसल कमजोर होने पर यूरिया की हल्की टॉप ड्रेसिंग और सल्फर एवं बोरान की पूर्ति के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करने का सुझाव दिया गया। हल्की बारिश फूल और फलियां बनने के समय नमी बनाए रखकर उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।