बूढ़े बाबू के तालाब की जल्द तस्वीर बदल सकती है। उसमें आने वाले घरों से निस्तारित पानी को प्राकृतिक विधि से साफ करने के लिए की जा रही तैयारी अंतिम चरण में है। पॉकलेन व जेसीबी दो बड़े टैंक बनाए जाने के लिए खोदाई का काम कर रही हैं। नगर के मायापुरी मोहल्ले में रेलवे लाइन किनारे दक्षिण दिशा में करीब पांच एकड़ रकबे में फैला बूढ़े बाबू का तालाब है। जिसमें मायापुरी, चौहानपुरी, लोहियानगर समेत कई मोहल्लों का पानी जाता है। इसमें प्रतिदिन दो लाख लीटर पानी आता है। वर्ष-23 में इस तालाब को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने के लिए चयन कर कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज यूपी जल निगम को कार्यदायी संस्था बनाया। कार्यदायी संस्था को जनवरी-24 में काम की जिम्मेदारी सौंपी और मार्च-25 तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे। पूर्व में इस तालाब के पानी को हर्बल तरीके से साफ किया जाना था। जिस पर 80 लाख रुपये भी खर्च कर दिए गए। लेकिन बाद में प्राकृतिक विधि से साफ करने को कहा गया। जिसके लिए कार्यदायी संस्था ने सबसे पहले उसमें जाने वाले घरों से निस्तारित पानी को रोका। साथ ही पंपसेट लगाकर तालाब का पानी बाहर निकलवाया। यह काम पिछले एक महीने से चल रहा है। तालाब के पश्चिमी किनारे पर पत्थर लगाकर उसे इस लायक बनाया कि उस पर लोग टहल सकें। इसके बाद उसकी सिल्ट निकाली जा रही है। घरों से निकलने वाले पानी को तालाब में गिरने से पहले प्राकृतिक विधि से साफ किया जाएगा। इसके लिए करीब तीन लाख लीटर पानी की क्षमता के दो भूमिगत टैंक बनाए जा रहे हैं। जिनके लिए पोकलेन व जेसीबी भूमि की खोदाई कर रही हैं। टैंक में लोहे की स्क्रीनिंग या जाली से पानी साफ किया जाएगा। जिनमें छनकर पानी आगे जाएगा। इससे आगे पत्थर की लेयर के साथ ही मोटा रेत इस्तेमाल किया जाएगा। उसमें छनकर और साफ होकर पानी तालाब तक पहुंचेगा। कार्यदायी संस्था के इंजीनियर संदीप उपाध्याय का कहना है कि तालाब में एवीआर तकनीकि से काम किया जा रहा है। तालाब में प्रतिदिन दो लाख लीटर पानी आता है, जबकि टैंकों की क्षमता तीन लाख लीटर है। मार्च तक काम पूरा कर दिया जाएगा।