पिछैती धान की फसल में कटुआ, खैरा और हल्दिया जैसे रोगों की चपेट में आ गई है। इन रोगों के चलते धान की बालियां विकसित नहीं हो पा रहीं, जिससे उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। अक्तूबर का आखिरी सप्ताह चल रहा है, लेकिन मौसम अब भी गर्मी का अहसास करा रहा है। दिन में तेज धूप और तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाने से न केवल लोग परेशान हैं, बल्कि इसका असर धान की फसल पर भी पड़ रहा है। धान की फसलों में विभिन्न रोग भी लग रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एनके मिश्र के अनुसार नमी की कमी व तापमान में वृद्धि के कारण धान की बालियां विकसित होने में दिक्कत आ रही है। इसका उत्पादन पर 15 से 20 प्रतिशत पड़ सकता है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि 1.28 हेक्टेयर धान की विभिन्न किस्मों की फसल लगाई गई है। वर्तमान में अगेती फसल की कटाई शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक मात्र 15 प्रतिशत फसल ही कट पाई है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, इस समय तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए, लेकिन लगातार बढ़ी गर्मी से फसल की विकास दर धीमी हो गई है। किसानों को पिछैती किस्म की धान की फसलों की बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। इसके लागत ज्यादा आने संग उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।