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VIDEO: ताजिया जुलूस बना एकता का प्रतीक, मुस्लिम परिवारों के साथ हिंदू समुदाय ने भी निभाई ताजियादारी की परंपरा

मुहर्रम के अवसर पर अमेठी जनपद के गांवों में निकले ताजिया जुलूस ने धर्म और आस्था की सरहदों को लांघते हुए सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। निहालपुर, मलावा, मंगरौरा, पालपुर, भनौली सहित कई गांवों में रविवार को मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ हिंदू समुदाय के लोग भी पूरी श्रद्धा से ताजिया जुलूस में शामिल हुए। यह दृश्य सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता का भी उदाहरण बना। इन गांवों में कुछ हिंदू परिवारों ने खुद भी अपने घरों में ताजिया बनवाया था। वहीं, सैकड़ों की संख्या में अनुसूचित जाति की महिलाओं ने ताजिया के जुलूस में शामिल होकर अगरबत्तियां जलाईं और मन्नतें मांगीं। मुराद पूरी होने की आस्था लेकर चौक से लेकर कर्बला तक हर मोड़ पर आस्थावान खड़े दिखे। उनका विश्वास था कि ताजिए के सामने मांगी गई दुआ बेअसर नहीं जाती। भनौली गांव में जुलूस की अगुवाई अंजुमन सिपाहे हुसैनी के नौजवानों ने की। इमामबाड़े से शुरू होकर यह जुलूस जामा मस्जिद, दरगाह, बीएसएनएल चौराहा होते हुए कर्बला पहुंचा। मौलाना अली मोहम्मद, मौलाना मूसवी रजा झारखंडी और मौलाना जवाद असगर जैदी ने अपने-अपने तकरीर में कर्बला की शहादत और इमाम हुसैन के संदेश को श्रद्धांजलि दी। जगह-जगह राहगीरों को शर्बत भी पिलाया गया। अजादारों ने नोहा-ख्वानी, जंजीर जनी और मातम कर कर्बला के शहीदों को याद किया। समाजसेवी इकबाल हैदर ने फाका शिकनी की व्यवस्था कर श्रद्धालुओं की सेवा की।बाजार शुकुल, निहालगढ़ और जगदीशपुर कस्बे में भी परंपरागत ताजिया जुलूस निकाला गया। ताजिए को कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक करने से पहले अंजुमनों ने शांति और इमाम हुसैन की कुर्बानी का संदेश दिया। पूरे आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद रही।

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