अमेठी में धान की रोपाई तेजी से चल रही है। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर डीएपी, यूरिया और कीटनाशकों की उपलब्धता की है। किसान चौपाल में विभिन्न विकासखंडों के किसानों ने बताया कि सहकारी समितियों पर खाद मिलने में दिक्कतें हैं, जबकि कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ताला गांव में आयोजित चौपाल में संजीव तिवारी ने कहा कि डीएपी के लिए कई बार समिति के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जरूरत के समय खाद नहीं मिलने पर निजी दुकानों से खरीद करनी पड़ती है। धर्मेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि कई बार खाद उपलब्ध होने के बावजूद ई-पॉस मशीन का सर्वर ठप होने से वितरण रुक जाता है और किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। नरेंद्र मिश्र ने कहा कि धान की रोपाई के दौरान डीएपी मिलने में देरी होने से खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित होता है। दिग्विजय नाथ ने बताया कि खरपतवारनाशी और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ने से फसल सुरक्षा पर खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। हरिश्चंद्र ने कहा कि जरूरत के मुताबिक सभी उर्वरक एक ही केंद्र पर नहीं मिलते। किसानों को अलग-अलग समितियों और दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संतोष तिवारी ने मांग की कि खरीफ सीजन में मांग के अनुसार उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसानों को अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सेवानिवृत्त कृषि अधिकारी लाल बहादुर ने कहा कि धान की रोपाई के दौरान डीएपी की समय पर उपलब्धता जरूरी है। सहकारी समितियों पर मांग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने और ई-पॉस मशीनों की तकनीकी दिक्कतें दूर करने की जरूरत है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में डीएपी, यूरिया, एनपीके और एसएसपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी केंद्र पर कमी या तकनीकी समस्या की सूचना मिलने पर तत्काल आपूर्ति कराई जाती है। किसानों को उनकी मांग के अनुसार उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं।