यूपी के अमेठी में कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के आंदोलन और विपक्ष की आवाज की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह निर्णय पहले ही ले लेना चाहिए था। यदि समय रहते फैसला लिया जाता तो आंदोलन के दौरान छात्रों को परेशानियों और चोटों का सामना नहीं करना पड़ता। सांसद किशोरी लाल शर्मा ने कहा कि छात्र अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इंडिया गठबंधन लगातार उनके समर्थन में खड़ा रहा और इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने आखिरकार छात्रों की भावनाओं को समझते हुए निर्णय लिया। उन्होंने इसे "देर आए, दुरुस्त आए" बताते हुए कहा कि सरकार ने भले देर से फैसला लिया हो, लेकिन इससे छात्रों की मांगों को स्वीकार किया गया है।