पूर्वी, छपरहिया, बेलवरिया जैसी लोक गायन शैलियों के लालित्य से शुक्रवार की शाम टारे टरे न लेख नौटंकी यादगार बन गई। लोक कला के साथ संगीत का अनूठा समन्वय देखते बना। रंग भाषा और वस्त्र विन्यास ने लोक स्वरों को हमेशा के लिए जेहनोदिल में यादगार बना दिया।
19 September 2026
18 September 2026
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