स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से... जैसी कालजयी रचनाएं देने वाले महाकवि पद्मभूषण गोपाल दास नीरज का 'जनकपुरी' स्थित आवास शनिवार को एक बार फिर यादों के उजाले से भर उठा। मौका था कवि नीरज के 101वें जन्मदिन (4 जनवरी) का, जिसके उपलक्ष्य में उनके पुत्र मिलन प्रभात गुंजन गुरुग्राम से अपने पैतृक घर पहुंचे। 1960 में नीरज जी द्वारा बनवाए गए इस घर की दीवारें आज भी उनके गीतों की गवाह हैं। अपने बचपन के गलियारों में घूमते हुए मिलन प्रभात भावुक हो उठे।