दर्जी को कपड़े सिलने के लिए देने के बाद सबको बेताबी होती है कि वह जल्द से जल्द उसे मिले और उसे पहने। अलीगढ़ के कई नामी दर्जियों के शोरूम में सैकड़ों जोड़ी सिले कपड़े हैंगरों में लटके धूल फांक रहे हैं, जो कोरोना काल के पहले ग्राहकों द्वारा सिलने के लिए दिए गए थे। इन्हें कोई लेने नहीं आ रहा। मेहनत-मजदूरी के लाखों रुपये फंसे हैं।