12 मई को पोस्टमार्टम के बाद दोपहर करीब 12 बजे मुकुल वार्ष्णेय और प्रमोद उर्फ पंडित के शव कस्बा में आए तो परिजन और रिश्तेदार विलाप करने लगे। मुकुल के दोनों भाई और उनकी पत्नी शव से लिपटकर रोने लगीं। वहीं गुड्डू पंडित के परिजनों का विलाप देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गई। लोगों ने परिजनों को सांत्वना देते हुए दोपहर बाद बाद समय करीब तीन बजे दोनों शवों का एक साथ मरघट में अंतिम संस्कार कर दिया।