आगरा। अरे, एक कश में कुछ नहीं होता। दो दाने खाकर तो देखो...मजा आ जाएगा। ऐसे ही शौकिया तंबाकू-सिगरेट शुरू की, फिर चस्का लगा और 8-10 साल में एक पाउच से संख्या बढ़कर प्रतिदिन तंबाकू के 6-10 पाउच तक पहुंच गई। एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग की ओर से 614 मरीजों (126 महिला और 488) पर किए गए अध्ययन में 77 फीसदी तंबाकू (गुटखा, खैनी) के लती मिले, जो रोजाना 6-10 पाउच तंबाकू खाने वाले थे। नतीजतन, जीभ-गाल और फेफड़े में कैंसर बन गया।