सिख धर्म के नव वर्ष चैत्र नानकशाही संवत 558 के आगमन पर शनिवार को गुरुद्वारा गुरु का ताल में विशेष गुरमत समागम का आयोजन किया गया। गुरुद्वारे में पहली बार नानकशाही कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष मनाने की एक नई पहल की गई, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने माथा टेककर आशीर्वाद लिया। समागम का शुभारंभ रहरास साहिब के पाठ और हजूरी रागी भाई लवजीत सिंह के कीर्तन से हुआ। संत बाबा प्रीतम सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी को अपने धर्म की प्रमुख तिथियों, गुरु साहिबान के प्रकाश पर्व, शहीदी दिवस और सिख महापुरुषों के गौरवशाली इतिहास से जोड़ना अनिवार्य है। दिल्ली के गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी अंग्रेज सिंह ने नानकशाही कैलेंडर के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, लुधियाना से आए रागी भाई तरनवीर सिंह रब्बी ने अपनी मधुर वाणी से कीर्तन कर संगत को भाव-विभोर कर दिया। पटियाला विश्वविद्यालय में गुरमत चेयर के डीन डॉ. अलंकार सिंह ने तंती साजों के साथ रागों पर आधारित बाणी का गायन कर समां बांध दिया। मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन ज्ञानी केवल सिंह ने किया। समापन आनंद साहिब के पाठ और अरदास के साथ हुआ। इस दौरान जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदोरिया, बाबा अमरीक सिंह, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कमलदीप सिंह, हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह, अजायब सिंह टीटू, सतवीर सिंह सुशील, गुरमीत सेठी, वीरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।