गंगाजल और सब्सिडी पर गैस न मिलने से आगरा का पेठा उद्योग संकट में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शासन 35 साल में सब्सिडी पर गैस मुहैया नहीं करा पाया। इससे पेठे की लागत बढ़ने से इकाइयां सिमट रही हैं। बीते एक दशक में पेठे की नई इकाइयां शुरू नहीं हुई हैं। व्यापारियों का कहना है कि शासन-प्रशासन का यही रवैया रहा तो पेठा इकाइयां बंद होने लगेंगी। शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि जिले में पेठे की करीब 500 निर्माण इकाइयां हैं। तीन हजार से अधिक विक्रेता हैं और करीब 60 हजार लोगों को इससे रोजगार मिल रहा है। टीटीजेड की बाध्यता के चलते सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में 128 कुटीर उद्योगों को सब्सिडी पर गैस उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। प्रशासन ने लापरवाही बरतते हुए पेठे को इसमें शामिल नहीं किया। बीते 35 साल से पेठा उद्योग से जुड़े उद्यमी चक्कर काटकर परेशान हो गए, लेकिन प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की। व्यावसायिक कीमत पर गैस खरीदने से पेठे की लागत बढ़ गई है। इससे उद्योग चलाना मुश्किल हो रहा है। कई बंद कर चुके हैं। नई इकाइयां भी कोई खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। सब्सिडी पर गैस और गंगाजल उपलब्ध होने से पेठे की लागत घट जाएगी। इससे नए उद्योग खुलने से राजस्व और रोजगार भी बढ़ेगा।