न तो खांसी थी और न ही सांस फूल रही थी, हल्का बुखार और वजन कम हो रहा था। पेट में परेशानी तो कभी हड्डियों में दर्द होता था। खुजली को सामान्य समझ रहे थे। जब स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों ने जांच कराई तो त्वचा, आंत और गुप्तांग में टीबी मिली। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और अब मर्ज में आराम मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के स्पेशल 100 दिन अभियान में 10,032 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है। अभियान में 312 शिविर लगाकर 1,44,234 लोगों की जांच की गई। इनमें 1197 बच्चों समेत 10,032 लोगों में टीबी मिली। इनमें से पल्मोनरी (फेफड़े) टीबी के 5120 और एक्स्ट्रा पल्मोनरी (फेफड़े को छोड़कर) के 4,912 मरीज मिले। इसमें एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीजों की संख्या 40 फीसदी अधिक मिली। ये हड्डी, बगल, पेट, आंत, त्वचा, बच्चेदानी, गुप्तांग समेत अन्य अंगों में पाए गए। जब बीमारी की पुष्टि हुई तो मरीज विश्वास ही नहीं कर रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें खांसी नहीं आती, सांस भी नहीं फूलती है। सभी का उपचार शुरू किया गया। टीबी के कुल मरीजों की बात करें तो 27,248 मरीज उपचार के बाद ठीक हो चुके हैं और 12,389 का इलाज चल रहा है।