फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VIDEO:चार दिन तक तस्करों से खरीदार बनकर बात करता रहा वन विभाग

पंकज जैन Updated Fri, 24 Jul 2026 04:49 PM IST

आगरा। लेपर्ड की खालों की तस्करी करने वाले गिरोह को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने चार दिन तक खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क बनाए रखा। खालों की खरीद के लिए बातचीत और सौदेबाजी के बाद तस्करों को सैंया हाईवे स्थित एक होटल में बुलाया गया। तस्करों की सहमति से तय इस जगह पर पहले से ही वन विभाग, आगरा पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने जाल बिछा रखा था। जैसे ही चारों तस्कर 10 लेपर्ड की खाल लेकर होटल पहुंचे, टीम ने उन्हें दबोच लिया। डीएफओ आगरा राजेश कुमार ने बताया कि करीब 10 से 15 दिन पहले विभाग को लेपर्ड की खालों की तस्करी करने वालों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद दो टीमें गठित की गईं। इनमें फतेहाबाद रेंज के रेंजर विशाल राठौर और खेरागढ़ रेंजर सम्यक कैन की टीम को शामिल किया गया। टीम के सदस्य सादे कपड़ों में तस्करों के संपर्क में आए और खरीदार बनकर उनसे 10 लेपर्ड की खाल उपलब्ध कराने की बात शुरू की। करीब चार दिन तक तस्करों से लगातार संपर्क और बातचीत होती रही। इस दौरान एक बिचौलिए के माध्यम से भी डील को आगे बढ़ाया गया। पहले तस्करों को शहर में बुलाने की योजना थी, लेकिन पकड़े जाने के डर से उन्होंने शहर में आने से इनकार कर दिया। इसके बाद तस्करों की सहमति से सैंया हाईवे स्थित एक होटल में मिलने की जगह तय की गई। तस्करों के होटल पहुंचने से पहले ही वन विभाग की टीम ने पूरी तैयारी कर ली थी। टीम को आशंका थी कि तस्कर हथियार लेकर भी आ सकते हैं, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से विशेष इंतजाम किए गए। वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम सादे कपड़ों में मौके पर तैनात रही। बृहस्पतिवार की शाम करीब 7:30 से 8:30 बजे के बीच जैसे ही तस्कर 10 लेपर्ड की खाल लेकर होटल पहुंचे, टीम ने कार्रवाई करते हुए चारों को हिरासत में ले लिया। चारों के पास से 10 लेपर्ड स्किन बरामद की गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद खालें उत्तर प्रदेश की नहीं हैं। इन्हें दूसरे राज्यों से लाकर तस्करी किए जाने की आशंका है। वन विभाग अब आरोपियों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटा है। खालों की सप्लाई कहां से हुई और इन्हें आगे कहां पहुंचाया जाना था, इसकी भी जांच की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई को वन विभाग, आगरा पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने इंटेलिजेंस इनपुट और सुनियोजित रणनीति के आधार पर अंजाम दिया। डीएफओ राजेश कुमार ने इसे बड़ी कार्रवाई बताते हुए कहा कि मामले में फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज की जांच की जा रही है, ताकि तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें